Saturday, October 24, 2015

तख्ती



             
       कलम

  
      तख्ती

   
    पढ़ाई


तख्ती पढ़ने का समय भी कितना अच्छा था
कभी तख्ती सुखाना
कभी स्याही सूख जाना और कभी
कलम का टूट जाना
वो अनमोल पल इक सपना हो गये
आज कम्पयूटर का युग है
बच्चे छी कह कर ये सब फेंक देंगे 
लेकिन तख्ती सुखाना
साथ में गुनगुनाना 
ये सब कहाँ जान पायेंगे 
बचपन की अनमोल यादें

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